वायु प्रदूषण : हर 3 मिनट में हो रही 1 बच्चे की मौत

0
643
stubble is ignited and poisonous smoke dissolves in the pure atmosphere

धान की फसल की कटाई शुरू होते ही पराली जलने लगती है और जहरीला धुआं शुद्ध वातावरण में घुलने लगता है। पूरे देश में हर साल करीब 35 मिलियन टन कृषि अवशेष एक समयावधि में जलाए जाते हैं जिससे राजधानी दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में स्थिति भयावह हो जाती है।

अगर कचरे की बात की जाए तो प्रत्येक वर्ष भारत में करीब 6 टन कचरा उत्पन्न होता है जिसमें से 25 फीसदी ही ट्रीट हो पाता है और बाकी खुले में फैंक दिया जाता है या फिर जला दिया जाता है। पंजाब एवं हरियाणा में प्रतिबंध के बावजूद आजकल के मौसम में पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। किसानों को सरकार जागरूक भी कर रही है लेकिन इस बात को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता है कि लोग वायु प्रदूषण के कारण बीमारियों का सामना करते हुए अपनी जान गंवा रहे हैं।

पंजाब और हरियाणा (Punjab and Haryana) के खेतों में कुल 3 करोड़ 50 लाख टन पराली जलाई जाती है। एक टन पराली जलाने से 2 किलो सल्फर डाइऑक्साइड, 3 किलो ठोस कण, 60 किलो कार्बन मोनोऑक्साइड, 1460 किलो कार्बन डाइऑक्साइड और 199 किलो राख पैदा होती है। आपको 7 शोधों के जरिए बताते हैं कि देश में हर 3 मिनट में वायु प्रदूषण से एक बच्चे की मौत हो जाती है और आपके स्वास्थ्य के लिए यह जहर कितना घातक है।

भारत में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि हर भारतीय ऐसी हवा में सांसें ले रहा है जो वायु गुणवत्ता के मानदंडों के मुताबिक असुरक्षित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की 91 फीसदी आबादी के लिए हवा की गुणवत्ता स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। दुनिया की सिर्फ 9 फीसदी जनता ही वायु प्रदूषण की चपेट में नहीं है।