दुखों का पहाड़ : 4 दिन बाद घर आने वाला था शहीद मनीष, तैयारी में जुटे परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़

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Shaheed Manish who was coming home after 4 day

शहीद मनीष ठाकुर 4 दिन बाद ही अपने घर कुनिहार के दोची आने वाले थे। छुट्टी आने की सूचना मनीष ने ही परिजनों को दी थी। बेटे के घर आने की खुशी में परिजन स्वागत की तैयारियों में जुटे थे लेकिन शहादत की खबर से उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। खुशी मातम में बदल गई है। अब चीख-पुकार के बीच लाडले के अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव देह पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।

दादी नानकी देवी, पिता राम स्वरूप, मां मीरा देवी को सांत्वना देने के लिए शहीद के घर रिश्तेदारों और लोगों का तांता लगा हुआ है। मनीष के बड़े भाई राहुल दुबई में कार्यरत हैं। वह भी दुबई से घर के लिए रवाना हो चुके हैं। सैन्य अधिकारियों ने बताया है कि पार्थिव शरीर सियाचिन से लेह पहुंचाया जाएगा। उसके बाद बाई एयर चंडीगढ़ लाया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि मनीष का पार्थिव शरीर बुधवार दोपहर बाद कुनिहार पहुंच सकता है।

शहीद के चाचा जगदीश सिंह ने बताया कि सेना में भर्ती होने का जज्बा मनीष में इतना था कि वह अपने दादा की मृत्यु पर उन्हें श्रद्धा सुमन भी अर्पित नहीं कर पाया। मनीष की ज्वाइनिंग 11 दिसंबर 2017 को थी। लेकिन उसके दादा नारायण सिंह की उससे पूर्व 10 दिसंबर की रात को मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद भी मनीष राष्ट्र धर्म को सर्वोपरि मानकर ज्वाइनिंग देने चले गए। मनीष की प्रारंभिक शिक्षा बंगयार व उच्चतर शिक्षा कुफटू में हुई।

ग्रेजुएट की शिक्षा ग्रहण करते हुए मनीष सेना में भर्ती हो गए थे। शहीद के मौसा भरत राम व चाचा बाबूराम ने बताया कि गत सोमवार रात करीब 9 बजे अधिकारियों का फोन आया कि सियाचिन में उत्तरी ग्लेशियर के आसपास कुछ सैनिक हिमस्खलन की चपेट में आ गए हैं। उनमें मनीष कुमार भी शामिल हैं।

वीरभद्र सिंह ने जताया शोक
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय सेना के चार जवानों और दो मजदूरों के बर्फ में दबने से हुई मौत पर शोक जताया है। वीरभद्र ने इस हादसे में शहीद हुए मनीष के शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की है।