कुमारसैन रघुनाथ मंदिर “ठाकुरद्वारा” आस्था एंव श्रद्धा का महत्वपूर्ण केन्द्र

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कुमारसैन में लगभग 1000 वर्षों का इतिहास संजोए रघुनाथ मंदिर “ठाकुरद्वारा” आस्था एंव श्रद्धा का महत्वपूर्ण केन्द्र है। वर्तमान में मंहत कमलदास ठाकुरद्वारा मंदिर कुमारसैन 21वें मंहत है। मंहत कमलदास जी के अनुसार रघुनाथ मंदिर (ठाकुरद्वारा) का भव्य निर्माण संम्वत 1831 में हुआ था। भगवान हनुमानजी इस कलियुग में महान शक्ति हैं, जो अष्ट सिद्धि और नव निधि के देने वाले हैं। उनको हिन्दू देवताओं में सबसे शक्तिशाली माना गया है। वह भगवान शिव के 11वें रूद्र अवतार थे जो श्रीराम की सेवा करने और उनका साथ देने त्रेता युग में अवतरित हुए थे, हनुमानजी इस कलियुग के अंत तक अपने शरीर में ही रहेंगे, वे आज भी धरती पर उपस्थित हैं।

हनुमान-भक्ति भोगवादी मनोवृत्ति के विरुद्ध एक प्रेरणा हैं संयम की, पवित्रता की। यह भक्ति एक बदलाव की प्रक्रिया है। यह भक्ति प्रदर्शन नहीं, आत्मा के अभ्युदय का उपक्रम है। ठाकुरद्वारा (रघुनाथ मंदिर) में पूर्व मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह सहित विदेशी भक्तों की भी अटूट आस्था है। स्थानीय लोगों और देश-विदेश से आने वाले साधकों के लिए यह एक प्रेरणा एंव श्रद्धा का केन्द्र है।