मुख्यमंत्री के तल्ख तेवर : बोले- कांग्रेस की सरकार होती तो बर्बाद होता हिमाचल, जानिए

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काम रोको प्रस्ताव पर पहले दिन जहां विपक्ष अपने ही बुने चक्रव्यूह में फंसता दिखाई दिया। वहीं दूसरे दिन कांग्रेस विधायकों के आरोपों की मुख्यमंत्री ने हवा निकाल दी। उन्होंने तल्ख तेवर अपनाए और हरेक वार की धार तर्कों से कुंद कर दी। उन्होंने विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी के शब्दों पर एतराज जताया। सदन में उन्होंने कहा, मैं हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं। सरकारी आवास ओक ओवर में नहीं रहूंगा, तो कहां रहूंगा? विपक्ष यह चाहता हैं कि वह तंबू में रहें।

राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश की जनता को कोरोना महामारी के बचने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने जो व्यवस्था सत्ता पक्ष के लिए विधायकों के लिए की, वही विपक्ष के विधायकों के लिए की। लॉकडाउन पूरे देश में आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत लगाया गया था और हिमाचल भी देश का अहम हिस्सा है। इसलिए यहां भी इस एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू किया गया।

उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसा कि अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होती तो पूरा राज्य बर्बाद हो चुका होता। उन्होंने नेगी से कहा आप दलाल जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। सख्त लहजे में बोले, कि कुछ तो शर्म करो। सदन ऐसे नहीं चलेगा। आप जो मर्जी बोलते रहें और हम सुनते रहेंगे। सरकार ने जनविरोधी कोई भी फरमान नहीं दिए हैं।

क्या कहा नेगी ने

कांग्रेस विधायक एवं विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी ने आरोप लगाया सरकार ने लॉकडाउन घोषणा के दौरान विपक्ष के विधायकों के साथ भेदभाव बरता। उन्हें घर तक जाने का भी वक्त नहीं दिया। आरोप लगाया कि ई – पास दलालों के माध्यम से दिए गए। ऐसा आपातकाल में नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ओकओवर से ही फरमान जारी करते हुए, लोग भूखे रहे। रिज पर सरकार ने अपनी महात्मा गांधी से भी ऊंची होर्डिंग लगाई है। उन्होंने हवन कार्यक्रम पर भी सवाल उठाए। इसके जवाब में जयराम ठाकुर ने कहा कि गांधी का कद सबसे ऊंचा है।

कई बार हुई नोक-झोंक, दलाल शब्द की होगी पड़ताल

जब नेगी बोल रहे थे तो इस दौरान उनकी सत्ता पक्ष के कई सदस्यों से तीखी नोक- झोंक हुई। विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने कहा कि वह दलाल शब्द की जांच पड़ताल करेंगे कि क्या यह असंसदीय भाषा में आता है या नहीं? उन्होंने कई शब्दों पर आपत्ति जताई।