फिर दम घोंटने लगी दिल्ली की हवा, पहली बार इस सीजन में वायु गुणवत्ता 300 पार

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Delhi air again suffocated

बता दे की इस सीजन में पहली बार दिल्ली की हवा बेहद खराब रही। बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के आंकड़े को पार कर गया। पूरी दिल्ली में दिन भर स्मॉग छाया रहा। इससे लोगों ने आंखों में जलन महसूस की। साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत रही। सफर का पूर्वानुमान है कि मौसम में बड़ा फेरबदल नहीं होने पर आने वाले दिनों में राजधानी के वायु प्रदूषण स्तर में और बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
दिल्ली की आबोहवा पर नजर रखने वाली सरकारी एजेंसियों का कहना है कि मंगलवार देर रात से यह आंकड़ा 290 से ऊपर चल रहा था। बुधवार दोपहर तीन बजे यह 301 तक पहुंच गया। वहीं, बीते 24 घंटों का औसत 304 तक रहा।

खास बात यह कि दिल्ली के 34 मॉनिटरिंग स्टेशन वाले इलाकों में से अधिकतर में सूचकांक 320 के आसपास रहा। सबसे ज्यादा खराब हवा द्वारका की रही। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 355 के पार रहा।

सफर का आकलन है कि बुधवार को हवा की खराबी का सबसे नुकसानदेह हिस्सा धूल के महीन कणों पीएम 2.5 का रहा। इसकी बड़ी वजह सतह पर चलने वाली हवा की चाल का धीमा होना है। इससे प्रदूषक दिल्ली के वातावरण में ठहर गए हैं। इनका फैलाव दूर तक नहीं हो पा रहा है।
प्रदूषण में पराली के धुएं का हिस्सा पांच फीसदी

सफर का कहना है कि स्थानीय मौसम में बदलाव आने से हवा बेहद खराब हुई है। इसमें ज्यादा प्रभाव बाहरी से ज्यादा घरेलू प्रदूषकों का है। बीते 48 घंटों में हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत बॉर्डर इलाके में पराली जलाने की घटनाएं ज्यादा दिख रही हैं। फिर भी, हवा की गति धीमी होने से इससे होने वाला प्रदूषण बड़ी मात्रा में दिल्ली नहीं पहुंचा है।

बुधवार को सिर्फ पांच फीसदी हिस्सा पराली के धुएं का है। वहीं, पूर्वानुमान है कि बृहस्पतिवार व शुक्रवार को यह आंकड़ा पांच से आठ फीसदी तक रहने का अंदेशा है।

  • दिल्ली के अलग-अलग इलाकों को प्रदूषण सूचकांक
  • (पूरी दिल्ली का शाम 6 बजे औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक: 311)
  • द्वारका सेक्टर- 8: 358
  • बवाना: 354
  • मुंडका: 350
  • आनंद विहार: 343
  • नरेला: 339
  • वजीरपुर: 339
  • विवेक विहार: 338
  • सीरी फोर्ट: 333
  • अशोक विहार: 332
  • रोहिणी: 332
  • डीटीयू: 331
  • जनकपुरी: 330
  • नेहरू नगर: 326
  • आया नगर: 320
  • बुराड़ी: 318
  • पंजाबी बाग: 318
  • ओखला: 316
  • जेएनयू: 315

  • बुरा असर क्यों :
  • बारिश न होना।
  • सतह पर चलने वाली धीमी हवा।
  • पराली का धुआं